जीवन शैली »
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मेरे 'कहानीकार' मित्रों,
कहानी कहना तो मुझे आता नहीं... कहानी यह है भी नहीं... प्रयत्न मात्र कर रहा हूँ अपनी ओर से...पता नहीं ठीक से कह भी पाऊँगा या नहीं...
हमारे ही शहर में, हमारे ही मोहल्ले में रहता है वह परिवार... बचपन से ही कभी-कभी आना जाना होता है उस घर में...
बहुत साहसी थीं वो... भरी जवानी में ही पति साथ छोड़ चल दिये दूसरे लोक को...दो छोटे बच्चे छोड़ कर गोद में... बेटी दो साल की